इस जगह पर भगवान Shiva ने पिया था विष | नीलकण्ड नाम कैसे पड़ा

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नमस्कार दोस्तों आप सभी को जय श्री महाकाल सभी महाकाल की दया से ठीक होंगे मित्रो आज हम बात करने हमले है भगवन सिव के ऊपर सभी ने कही न कही यह जरूर सुना होगा की भगवन सिव ने विष पिया था लेकिन यहाँ किसी को नहीं पता की विष कोनसी जगह और क्यों पिया था उसी का अज्ज के ब्लॉग में ट्रैवेलिंग यात्रा आपको बताने जा रही है

JAI SHREE MAHAKAL –
इस जगह पर भगवान Shiva ने पिया था विष
इस जगह पर भगवान Shiva ने पिया था विष

 

कुछ ऐसा स्थान का पता चलता हे की बी भगवन सिव ने पिया था यहाँ विष अज्ज  उसी दिव्य स्थान से मिलवाने जा रहे हे जैसा की हम सभी जानते हे की सनातन धर्म के प्रमुख  भगवान सिव जिन्हे देवो के देव महादेव भी कहा जाता हे जिन्हे संघार का देवता भी मन जाता हे सेठ ही साथ इसके आलावा भगवन सिव को भगवन संकर भोलेनाथ और नीलकांत संभु के नाम से पूजा जाता हे

NEELKAND

भगवान् सिव बहुत सी सरल और संत होने से भोलेनाथ कहलाते हे वही अगर दूसरी और देखे तो संघरा के देवता होने से धरती की रक्षा के लिए उन्होंने समुद्र मंथन के दौरान विष पैन किया गया था और विषपान से ही उनका एक और नाम पड़ गया जिसे हम अब नीलकण्ड के नाम से जानते हे – JOIN OUR WHATSAAP

WHICH PLACES 

भगवान् भोलेनाथ , नीलकण्ड के नाम से विषपान की कथा तो अपने कही बार सुनी होगी लेकिन क्या आप वह जगह जानते हे जहा भगवान् भोले यानि नीलकण्ड जी ने विष का पान किया था अगर नहीं पता तो अज्ज आपको उन्ही जगह के बारे में जहा मन जाता हे की भगवन सिव ने यही पर विष पैन किया था और इसी के बाद से उनका नाम नीलकं पड़ गया

अगर बात करे देव भूमि की तो उत्तराखंड में मौजूद ऋषिकेश जिसे हिमालय का आगमन दरवाजा मन जाता हे और यहाँ जगह पर मौजूद है उत्तर महादेव मण्डफिर जिसे उत्तर प्रमुख मंदिरो में से एक है यहाँ मंदिर ऋषिकेश के पास मैकुट पर्वत पर स्थित हे साथ यह भी मत्ता हे की समुद्र मंथन के दौरान निकला विष भगवान् सिव ने यही स्थान पर पिया था और उसी के प्रश्चात विष पिने के बाद भगवान का गाला नीला  पड़ गया था इसी लिए उन्हें नीलकण्ड कहते हे

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इस मदिर कोलेकिन बहुत से तेथ भी मौजूद हे की जब भगवन सिव ने विषपान किया था तो उसी समय माता पारवती ने उनका गाला दबाया वह उन्होंने इस लिए किया क्युकी ऐसा करने से विष उनके पेट तक नहीं पहुंच सके इस तरह विष उनके गले में बना रहा और उनका गला पूरा नीला पड़ गया गाला पूरी तरह नील से भर गया यानि नीला पड़ गया तभी भगवान् सिव जी का एक नया और अलग नाम रखा गया जिसे हम नीलकण्ड कहते हे

THANKYOU FOR READING | – JAI SHREE MAHAKAL

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